BREAKING NEWS

The Slider

[recent]

Entertainment

Technology

Travelling

Friday, 15 July 2016

बिहार ने पछाड़ा गुजरात को, पहुँचा टॉप पर

एक बार फिर हमारा बिहार चकचका गया। जी हाँ, हमारा अपना बिहार टॉप पर  पहुंच गया, और ये बात हम नहीं आंकड़े कह रहे हैं। 



इस बार अपने बिहार ने उन्नत्ति के मामले में गुजरात को भी पीछे छोड़ दिया है। ये सभी आंकड़े आये हैं योजना मंत्रालय से। जिसमें बताया गया है कि नीतीश कुमार की सरकार में बिहार का Gross State Domestic Product (GSDP) 2014-15 में 15.6% है, जो की अबतक का रिकॉर्ड है। और इसके साथ ही बिहार टॉप कर गया GSDP की रेस में। 



वहीं आनंदीबेन पटेल की गुजरात सरकार का GSDP इस साल घट कर 6.7% पर आ गया है, जो की पिछले 10 साल के मुकाबले सबसे कम है। 

भारत के जाने-माने परिस्थिति विज्ञान शास्त्री (Ecologist) घनश्याम शाह ने कहा कि इसके पीछे राज्य की नयी व्यापार नीति है जो की छोटे और नए उद्यमियों को मौका दे रही है। 

अब भाई आप ही बताइए बिहार आगे बढ़ रहा है या नहीं। थोड़ा समय दीजिये महराज, सब कुछ सही हो जायेगा। वैसे अंग्रेजी में ए गो कहावत है - "Rome was not build in a day"

तो आप भी तनिक सब्र रखिये, काहे की सब्र का फल मीठा ही होता है। 



Thursday, 14 July 2016

Nalanda Open University, Bihar begins Admission for Distance Education 2016

Nalanda Open University, Patna invites application for admission to Under Graduate and Post Graduate Courses for the academic year 2016.

Nalanda Open University Distance Education has released notification from the eligible candidates for admission into various courses. Candidates can choose any of the courses which are offered by NOU.
Candidates can check the complete information of Nalanda Open University Distance Education 2016 application process, eligibility criteria and other information on this page below.
Courses Offered & Eligibility Detail
PhD
Eligibility: Post Graduation in Relevant Area*
Duration: 2 years
Master’s Degree in Arts Subjects
Eligibility: Bachelor or equivalent Degree in any subject
Duration: 2 years
Master’s Degree in Science Subjects
Eligibility: Bachelor or equivalent Degree in the concerned Science subject
Duration: 2 years
Master of Library and Information Science (MLIS)
Eligibility: BLIS
Duration: 1 year
Master’s Degree in Journalism and Mass Communication (MJMC)
Duration: 2 years
Eligibility: Bachelor Degree or equivalent Degree in any subject or PGDJMC     
Master of Computer Application (MCA)
Eligibility: BCA/ B.Sc. (Computer Science) or Bachelor’s Degree with Mathematics as a subject
Duration: 3 years
Master’s Degree in Commerce
Eligibility: Bachelor’s Degree in Commerce
Duration: 2 years
PG Diploma Courses
Eligibility: Bachelor’s Degree or equivalent*      
Duration: 1 year
B.Ed Courses
Eligibility: Bachelor’s Degree in any subject with atleast 45% marks at graduate level plus 2 years teaching experience
Duration: 2 years
BLIS
Eligibility: Bachelor Degree or equivalent*
Duration: 1 year
Bachelor’s Degree in Arts Subjects
Eligibility: Intermediate in any stream
Duration: 3 years
Bachelor’s Degree in Science Subjects
Eligibility: Intermediate in Science
Duration: 3 years
Bachelor’s Degree Courses (B.Com)
Eligibility: Intermediate in any stream   
Duration: 3 years
BCA
Eligibility: Intermediate with Maths or I.A with Certificate in Computing
Duration: 3 years
Intermediate
Eligibility: Matriculation or Equivalent
Duration: 2 years
Certificate Courses
Eligibility: Matriculation or Intermediate as per requirement of each programme  
Duration: 9/6 Months
Conditions Apply (Note – Only such degrees and certificates will be considered as equivalent which have been recognized as such by the Academic Council of the Nalanda Open University)

How to Apply

Candidates seeking admission in various courses at NOU Distance Education can fill their application form from the website www.nalandaopenuniversity.com on or before the last date of application
Any eligible person can apply for admission in one of the courses of his choice, offered by the University
The admission form (Annexure-A) and Prospectus may be obtained through Demand Draft of Rs.350/- from the sales counters of the University or by sending the Demand Draft of Rs.400/- by registered post, drawn in favour of Nalanda Open University, Payable at Patna
No money order or postal order is accepted
The demand draft must be made in the name of Nalanda Open University payable at Patna. The sales counters of the University function on all working days from 10.30 AM to 05.00 PM
The admission form, supported by the photo copy of the following documents, must reach the Registrar, Nalanda Open University, 3rd Floor, Biscoumann Bhawan, Patna 800001, Bihar, before the last date for submission of form, either personally or by registered post

Important Dates

Availability of Application Form: 12th July 2016
Last date for admission is 17th August 2016
Nalanda Open University, Patna
2nd/3rd & 4th Floor, Biscomaun Bhawan, Gandhi Maidan, Patna-800001 (Bihar), Website: www.nalandaopenuniversity.com, www.nou.ac.in

Source

एक अनोखी पहल - घर बैठे दर्शन कीजिये बाबा बैद्यनाथ के

भोले बाबा सुनते भक्तों की URGENT हैं । जी हाँ, हम आप और सभी जानते हैं कि हमारे अपने भोले बाबा अपने भक्तो का पूरा ख्याल रखते हीं नहीं बल्कि उनकी सुनते भी अर्जेंट हैं। 


इस बार आपकी सुनी है, सरकार ने। जिसने बाबा के भक्तों को एक सुनहरा मौका दिया है मिलने का और वो भी डायरेक्ट। अब आप अपने भोले बाबा से मिल सकते हैं अपने घर बैठे अपने मोबाइल और कंप्यूटर के जरिये। 


इस बार से विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेले को ऑनलाइन कर दिया गया है। श्रावणी मेला और ॐ नमः शिवाय के नाम से वेबसाइट चालू किया गया है जिसपर सुल्तानगंज स्थित अजगैवीनाथ , देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ और वासुकीनाथ स्थित बाबा वासुकीनाथ के मंदिर और उनमे होने वाले पूजा पाठ को भी दिखाया जा रहा है। 



देवघर और सुल्तानगंज में मेले के ऑनलाइन प्रसारण की भी व्यवस्था होगी। यहाँ पर आपको बता दें कि श्रावणी मेला इस साल 20 जुलाई से शुभारंभ हो रहा है। भागलपुर और देवघर  जिला प्रशासन के वेबसाइट पर भी श्रावणी मेला की वेबसाइट को कनेक्ट कर दिया गया है। 


मेले का रोडमैप भी ऑनलाइन कर दिया गया है। वेबसाइट पर ऑनलाइन पूजा करने का भी ऑप्शन उपलब्ध है। साथ हीं इस वेबसाइट पर पूजा के विभिन्न तरीकों और मंत्रो के बारे में भी बताया गया है। 



हम सरकार की इस पहल की प्रशंसा करते हैं और आशा करते हैं कि ये नई तकनीक इस पावन पर्व को और भी सुगम बनाएगी। 

तो एक बार जोर से हमारे साथ बोल दीजिये भोले बाबा की....जय॥ 

खुशखबरी रेलगाड़ी से - अब मिलेगा पेट के साथ तशरीफ़ को भी आराम



लो भइया आ गई खुशखबरी!! और इस बार ये खुशखबरी आई है हमारी, आपकी और सबकी छुक छुक रेलगाड़ी से। 



तो इस बार रेलवे बोर्ड ने यात्रियों के सुविधा के लिए नए कोच बनाने का निर्णय लिया है। सबसे बड़ी ख़ुशी की बात तो उनलोगो के लिए है जिनको ट्रैन के डब्बे में ही सबसे ज्यादा टॉयलेट जाना होता है। अब इन लोग को अपने सीट पर से ही पता लग जायेगा कि उनके कोच का टॉयलेट खाली है या भरा हुआ। 

कुछ ट्रेनों में ये सुविधा पहले  ही है लेकिन इसके लिए भी आपको सीट से उठ के देखना पड़ता था कोच के गेट के ऊपर लगे दो भुकभुकिया लाइट्स को जो कि जब लाल रहे तो टॉयलेट में जरूर कोई अपना पेट खाली कर रहा होगा और यदि यह हरा रहे तो मतलब आप खाली कर सकते हैं। 


पर अब ये सुविधा आपको अपने बर्थ पर ही मिल जाएगी। रेलवे बोर्ड ने नए कोच में ये भुकभकिया लाइट्स आपके बर्थ के पास ही लगाने का निर्णय लिया है। जिससे आपको पता लग जायेगा की अपना पेट खाली करने के लिए अपने बर्थ से उठे या सुते रहे और लाइट का हरा होने के इंतजार में पेट को थोड़ा और सहलाए।

अब हम सबको पता है आजकल ट्रैन का कन्फर्म टिकट मिलना जैसे प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज से अच्छी नौकरी मिलना। भइया ये मिल जाये तो इंसान को जन्नत वाला सुख मिलता है, नहीं तो घर के साथ साथ बाहर वालों के ताने भी। मजे की बात तो ये है दोनों के लिए आपको सोर्स लगाना ही पड़ता है। और दोनों ना मिलने पर एक विकल्प जरूर है, कन्फर्म टिकट नहीं मिलने पर या तो अपनी यात्रा अगले दिन के लिए बढ़ा दीजिये और नौकरी नहीं मिलने पर अगली कंपनी की ओर बढ़ जाइये। लेकिन कबतक बढ़ाईएगा, एक दिन तो यात्रा करनी ही है और एक दिन नौकरी भी ( अब ज्यादा पैसे हैं तो फ्लाइट से चले जाइएगा और हमारे इंजीनियरिंग के छात्र लोग स्टार्ट उप खोल लेंगे), सो ट्रैन में कन्फर्म टिकट नहीं मिलने पर आप जायेंगे जनरल से और सही नौकरी नहीं मिलने पर कही 5000 रूपए वाली नौकरी पर। 


अब नौकरी का तो पता नहीं, पर जनरल वालो के लिए रेलवे बोर्ड ने सोचा जरूर है। जनरल में आप कभी गए होंगे (कभी न कभी तो गए ही होंगे, और यदि नहीं गए तो भइया आप सच्चे रेलवे पैसेंजर नहीं हैं)। अरे मरदे जिंदगी में सब कुछ का मजा लेना चाहिए तो जनरल को काहे छोड़ दिया जाए, उसका भी एक बार मजा लीजिए। तो हाँ, अब रेलवे बोर्ड ने जनरल वालों के लिए ऊपर वाली बर्थ जो कि सामान रखने के लिहाज से बनाया गया था पर लोग तो दो सीट के बीच में चाद्दर बांध के सोते हैं तो ई ऊपर वाला बर्थ आपको लगता है कि खाली छोड़ देते होंगे सामान रखने के लिए। उसपे भी लोग बैठते हैं( सोने का सोच रहें हैं, तो आपको जरूर एक बार जनरल में चढ़ना  पड़ेगा) और रेलवे बोर्ड ने आपकी तशरीफ़ को थोड़ा आराम देने के लिए ऊपर वाले बर्थ पर भी गद्दा लगने का निर्णय लिया है। 


तो भइया अब कभी जनरल में सफर करियेगा तो तशरीफ़ को आराम जरूर दीजिएगा काहे कि ये सब उसी के खातिर किया जा रहा है। चलते चलते ये भी बता दें, कि ये टॉयलेट वाला भुकभुकिया जनरल डब्बे में भी लगेगा। 

बस एक ही रिक्वेस्ट है आपलोग से कि तनिक साफ़ रखने का कोशिश कीजियेगा ट्रैनवो को, काहे कि लिखल तो रहता है कि ट्रैन आपकी संपत्ति है पर अपनी संपत्ति जैसा ख्याल आपलोग नहीं रखते। तनिक मूंगफली फोड़ के छिलकवा उसी कागज में रख लीजिए नहीं तो एक एक्स्ट्रा कागज मांग लीजिए उसी मूंगफली वाले से। सब छोडिए न्यूज़पेपर तो होगा हीं, उसी में बांध लीजिए और कहीं कूड़ेदान में डाल दीजिएगा (अब न्यूज़पेपर रखना हो तो आपकी मर्जी है)। इससे ट्रैन भी साफ़ रहेगी और रात में जो लोग नीचे सोते हैं उनलोग को भी कचरा नहीं मिलेगा। अब नीचे सोने वाले का, का करियेगा, घर तो जाना ही है सबको, टिकट कन्फर्म नहीं मिला और जनरल में भी खड़े होने का जगह नहीं मिले तो नीचे सोना मज़बूरी बन  जाता है, काहे की हमरे चच्चा का कहना है जब संपत्ति अपने है तो पूरा उपयोग किया जाए।


तो अबसे आपको नए कोच के लिए मुबारक बस ये देखना है कि यह घोषणा कबतक पटरी पर आती है। पर एक दिन जरूर आएगी, एतना तो भरोसा करना ही पड़ेगा। 

Wednesday, 13 July 2016

आज का क्लास:" ...चोरी तो नहीं की है..." वाली मस्ती गयी तेल लेने- ई बिहार है!!!

...चोरी तो नहीं की है, थोड़ी सी जो...


जो भी बकैती हुआ हो पर याद रखना की अब झूमना मन है।
सामने वला चचा दारोगा हैं, हलको सुन लिए न तो फिर सुने लायक ना छोड़ेंगे। 



कुछ पते नहीं है! भीतर जाओगे न और जब बिना नशा वला फ़ीट फ़ीट भर का डंडा बरसेगा और उसके बाद जो प्रोसेसिंग वला नशा तैयार होगा, वही बिहार है...

शोख़िओ में घोल जाए... या फिर ... नशा शराब में होती तो... गाते रहिएगा! केतनो दलील दे दीजिएगा कि माइ बाप! शराबी के अमिताभ जी को ऐसे ना इग्नोर मारो लेकिन कुछ ना होगा।पूर्ण शराब बंदी है बिहार में, हाफ नहीं साफ़ नशा टटोल बंद। नाम लेना भी गुनाह है। 

इंहा ले सुनने में आया है कि नशीले गीत, गजल, कविता, फिल्म-नाटक सबका मुख-कान-नाक-आँख और दिमाग से सेवन करना भी यंहा दंडनीय और माननीय अपराध है। 


इसलिए बता रहे हैं कि कंही अगर दिख जाए लाल लाल नैन तो चार आठ करने से पहले नौ दू ग्यारह हो लेना।



पहिले भी बताए थे हम की लिमिट में रहो, लिमिट पार किए की एक रात भी नहीं लगेगा और जनरल गदाफी की तरह नेस्तनाबूद कर दिए जाओगे। 

अब बात तो मानोगे नहीं तुम आज के लौंडे। इतना ना कांड किया कि करा दिया विदाई अमृत जल का बिहार से और कर दिया बर्बाद सारा रसपान करे वाला लोग का जिनगी।भेजा में मतलब कुछ है ही नहीं न तुमलोगो का।

वैसे भी गलती तुम्हारा भी नहीं है, सब उनका देन है। अब भुगतो!!
अब का करोगे, देख लो गठबंधन वाले भाई लोग को, जंहा से नशा उत्पन्न हो रहा है वही से तुम भी कर लो। अब दू तीन गो को टपका के ऊर्जा मिल रहा है तो का बुराई है। रोके भी कौन, किसको हेतना फुर्सत है?

सबको अपना अपना नशा का फ़िक्र लगा हुआ है, इसलिए तो चुप थे लेकिन अब पानी न सर से ज्यादा हो रहा है।ना बचोगे तुमलोग और ना वो लोग, अपना पे आ गए ना तो रोकेंगे कम और ठोकेंगे ज्यादा। समझा दो अपने साहब को और तुम भी समझ लो की जो सियापा और रायता तुमलोग फैला रहे हो उसमे तुम ही सड़ोगे। 

अब चचा अपने ठहरे जानकार बता रहे थे कि चर्च के फादर को नशा नहीं होता है। पता ना कवन केमिकल लोचा है। बंटी कह रहा था जो भी है सही है हम भी धार्मिक प्रवृत्ति के ही है, तो हम भी एही लाईन में घुस जाते हैं। इंग्लिशे तो जानने भर का देर है। बाकी तो अपना लार्ड कर देगा।




लगे हुए हो बुरबक की तरह सब अपने अपने नशे में जैसे हमको कुछ पते नहीं है। रोज तुम्हारे अइसन केतना केतना का रामायण महाभारत करवा देते है एक्के क्लास में। 

किसी को धन-बल का, किसी को जन-बल का!किसी को सत्ता सियासत का तो किसी को देश आउर पंचायत का!किसी को चेहरे पे हंसी का, किसी को सुन्दर प्रेयशी का!और ई सब नशा के धुन में तुम लकग क्या क्या गलत सही कर ले रहे हो। ऊपर से ई भी कहे जा रहे हो कि नशाबंदी वला 'एक्ट' ई फील्ड से बाहर है। 



अरे! एक ठो नशा तो हम भूलिए गये थे। लगता है हमरो बोले वला नशा धर लिया है। रोज दू तीन चमाट लगाए बिना सुकून नहीं मिलता है न।.. खैर, ई जो घूस वला नशा  है न उससे बचिएगा बौआ लोग। ई नशा जो है न पूछिए मत पेट में आ जाता है, दिमाग न्यूट्रल रहता है।

ईहे नशा का कमाल है की रोज बैंक लूटा जा रहा है आजकल। 
और तुमलोग हो की मानिए ना रहे हो, भाई सच में बिहार में शराबबंदी है।


अब लीजिए बगल में कोई गा रहा है कि "थोड़ी थोड़ी पिया करो, पियो लेकिन रखो हिसाब..." तो ई पाहिले समझना चाहिए था न। बात तो वैसे सही ही है। थोड़ी थोड़ी गटकने से सेहत भी मस्त और सामजिक व्यवस्था भी टंच। लेकिन सवाल यह है कि, थोडी या ज्यादा पीना है यंहा मना। 

हमरा तो एक्के उपदेश रहा है, नशेड़ी गंजेड़ी लोग से कुछ होने वाला है न तो थोड़ा भी कहे 'पेरमिस्सेबुल' रहेगा। जो भी है, सहिए है।


बस इतने बात है कि अब भी कम से कम ई नशा वला अपने करैक्टर से बाहर निकलो। इतना कुछ ही रहा है बाहर। बिहार में बहार की बातें हो रही है। और ई बहार जो है न तुम्हारे घर में बैठ के 'डेवलपमेंट और जंगलराज' का रोना रोने से तो बिलकुल ना आने वाला है। सुधार जाओ टाइम है। तुम्हारा भी नाम हो जाएगा लगे हाँथ।ना त गाते रहोगे जिनगी भर उहे बरसात वला राग हर सावन में।"भरी बरसात के मौसम में, तन्हाई के आलम में..."


[[आप काहे रुके हुए हैं? अगर लगाना है क्लास आपको भी तो लिख भेजिए bolstory@bolbihari.com पर। साथ में लगे हाँथ अपना एक फोटू भी चांप दीजिएगा]]


(आल द इमेजेज आर प्रॉपर्टी ऑफ़ देअर ओनर। we owe our thanks)

Tuesday, 12 July 2016

आज का क्लास : ट्राफिक रूल और तुमलोगो का सियापा (सुधर जाओ, बता रहे हैं)

बात इ है कि सैलुटेशन वाला फॉर्मेलिटी इंहा ना होता है, हमलोग बस लिख के ही ले लेते हैं।


आज की क्लास उन भाई बंधुओ के लिए है जो ट्रैफिक रूल को न मानने की कसम खा चुके हैं, इसे ना मानना उनके खून में ऐसे ठूंसा गया है जैसे केजरीवाल में नौटंकी और लालुआ के भेजा में ****. (हम बस ऑफ्फेन्सिव ना होना चाहते हैं 😋 )


जैसे भागलपुर की किसी गली में चले जाओ, वहां 'यहाँ पेशाब करना मना है' वाला बोर्ड अगर लगा हुआ है तो इसका सीधा सा मतलब है एक निमंत्रण उन भाई बंधुओ को जिनको आज हम कर लिए है टारगेट और सबसे ज्यादा विसर्जन वहीँ होगा। ( ना, हम हॉस्पिटल के पीछे वाली गली की बात एकदम ना कर रहे।)


सीतामढ़ी के लौंडे तो इस मामले में अव्वल दर्जे। गर्ल्स कॉलेज की बाहर जो 'गाडी धीरे चलाए' उसको तो वो पुरे नियत के साथ फॉलो करते हैं।


कूल डूड वहां आते ही मीटर खींच देंगे और अपने चक्षु लगा बैठते हैं लड़कियों पर इसलिए सामने ब्रेकर पर ओंधे मुह गिरकर अपनी तशरीफ़ तुड़वा लेते हैं ,और कुछ लोग बोर्ड पढ़ते ही गाडी इतना धीरे कर लेंगे की कछुआ भी ओवरटेक कर जाये ,असल में ये महानुभाव नियम नही मान रहे होते हैं लड़कियों को देखकर आँखे हरी कर रहे होते हैं | और साहब हैलमेट तो यहाँ तभी पहना जाता है जब कोई लड़की पीछे बैठी हो और मुंह छुपाना हो…. इस होड़ में अंकल लोग भी कहा पीछे हटने वाले हैं जिस दिन अपनी दो इंची जुल्फें रंगवा डालते हैं उसी दिन हैलमेट सर की बजाय हाथ में आ जाता है | और पापा की परियां, एंजेल , प्रिंसेस जिनका अपना अलग ही स्टेटमेंट होता है ‘ट्रैफिक रूल्स माय फूट……महाय लाय्फ़ महाय रूल्स’ जिनको हैलमेट पहनाना मतलब घोड़े को खुरताल पहनाना…और जब ये परियां फॉर व्हीलर की सीट पर बैठती हैं तो किसी को सवर्ग की सैर करवा कर मानती हैं, इनका बस चले तो घर में बैठे इन्सान को दूसरा माले पर जाकर टक्कर मार दें | 


मासूमियत के आड़ में कुछ लौंडे तो ट्रैफिक पुलिस के तोंद के नीचे से ऐसे भाग जाते हैं, जैसे चूजा अंडे से।

और इस बेइज्जती का कहर उन बेचारे शरीफो पर बरसता है जो दीदी कल जल्दी स्कूल पहुँचाने के चक्कर में हेलमेट घर छोड़ देते हैं।
और हद तो तब हो गयी थी जब दरभंगा वाले चाचा का इसी चक्कर में चालान कट गया। वो तो बाद में पता चला की चचा तो हमरे पैदल ही तान रहे थे।

इसलिए कह रहे है मूढ़ प्राणियो, सुधर जाओ वरना बाद जो धक्के चढ़ता है उसपर सारे चार्ज लगा डालते हैं आजकल, सीट बेल्ट नही लगाया , बत्ती तोड़ी , हैलमेट नही है, RC नही है ,लाइसेंस नही है ,घर पर आटा नहीं है ,तेल नही है, साबुन नही है………
दिल्ली मोड़ या फिर कांटी की हाईवे, ट्रक ड्राईवर का कहर चरम पे होता है वे सब जगह, ये तो पैदा ही सिग्नल तोडकर होते हैं जब ये गाड़ी ले कर सड़कों पर उतरते हैं तो लगता है मानो किसी ने बीच सड़क सांड को खुला छोड़ दिया हो ,ऐसे में जब ये हॉर्न भी बजाते हैं तो लगता है माने यमलोक में शंख बज रहा हो….

तो सुनो ऊपर लिखित किसी भी कैटेगरी में आने वाले भाई बंधज चाचा लोग, 

सब हंसीं मजाक से परे जिंदगी उपर वाले का दिया सबसे अनमोल तोहफा है, इसे जाया ना करें , अपनों की नजर में अपनी अहमियत समझें जिनको आपके घर के बाहर बाइक लेकर निकलते ही चिंता सताने लगती है…आपकी तेज़ रफ़्तार और लापरवाही आप की नही किसी दुसरे के घरों के भी चिराग बुझा सकती है ….अपना कर्तव्य समझें…ट्रैफिक नियमों का पालन करें ||



[[ अगर आप भी क्लास लगाना चाहते हैं तो फटाफट लिख भेजिए bolstory@bolbihari.com पे। एक फोटू भे लगे हाँथ अपना चांप दीजिएगा साथ में]]

आल दी इमेजेस आर प्रॉपर्टी ऑफ़ देअर ओनर। (we owe our thanks )

Monday, 11 July 2016

बिहार की सब्जी पर मेक्सिको के वैज्ञानिकों का शोध


बिहार के लोग तो कमाल हैं ही, सब्जियो कमाल किये हुए है। जी हाँ, बिहार की इस सब्जी ने देश ही नहीं विदेश में भी कमाल कर दिया है। 




ये सब्जी कोई और नहीं, सबकी पसंदीदा सहजन ही है। अब इतना चौंकिए मत, सहजन का गुण तो हम सभी जानते ही हैं बाकी थोड़ा बच्चा सब नहीं जानता है। लेकिन ये खबर जरूर पढ़ाइये उन बच्चों को जो इस को सब्जी खाने में नाक सिकोड़ लेते हैं। 




सहजन की इस सब्जी पर शोध करने मेक्सिको से वैज्ञानिकों की एक टीम आई है बगहा में जहां वो लोग करीब एक हफ्ते तक रुक कर इसपे शोध करेंगे। वैज्ञानिक टीम के लीडर वनस्पति विज्ञानी मार्क ई. आंलसन ने कहा कि सहजन विटामिन और प्रोटीन से भरा अद्भुत क्षमता रखने वाला पौधा है। पत्ते चबाते हुए उन्होंने कहा कि इसकी सब्जी ही नहीं, फूल व पत्ते से लेकर तने तक में गुणों की भरमार है। 


शोधपत्र का हवाला देते हुए कहा की सहजन सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक है। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-टोक्सिन और एंटीबायोटिक की भरपूर मात्रा होती है। वही विटामिन ए, बी, सी सहित श्वेत रक्त कण को मजबूत करने की बेजोड़ क्षमता है। 

हम और आप जानते ही हैं की सहजन की खेती बिहार में एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन विशेष रूप से यह पौधा गोबर्धना, दोन और मंचचंगवा में सालों भर उपजाया जाता है। आमतौर पर हमारे किसान भाई इसके गुण के बारे में कम हीं जानते हैं और बाकी लोग भुईली के डर से इससे दूर रहना चाहते हैं। लेकिन शायद इस शोध टीम के आने से लोग इसके बारे में और भी जान गए होंगे (अरे भइया अब हम ही बता दिए ना) और इसकी खेती में जोर आएगा। यहाँ अब बता दें कि कुछ सहजन सालों भर पाये जाते हैं। 


तो बच्चा लोग अब सहजन चूसना शुरू कर दो काहे की यही इसका देसी तरीका है खाने का। और ई विदेशी लोग को भी बता दें कि बिहार में और भी बहुत कुछ है शोध करने को। थक जाओगे मर्दे लेकिन यहाँ की विशेषता खत्म नहीं होगी। 



   

बिहारी छोरा बिलायती दुल्हनिया

और एक बार फिर तय हो गया की एक बिहारी कुछ भी कर सकता है बस ठान ले तो।



ऐसा ही कुछ नजारा दिखा पटना के होटल मौर्या में जहां कल एक बिहारी बाबू का ब्याह गोरी मेम से हो गया। और हैं बिहारी तो अंदाज भी इंडियन ही होना चाहिए। सो ये शादी भी हुई भारतीय इस्टाइल में ही।




अपने बिहारी बाबू ई चन्द्रशेखर जो की ई शशिभूषण सिंह जी के सुपुत्र हैं और पूर्वी चम्पारण जिले के बरवा(लखौरा) के निवासी हैं उनको चढ़ा प्यार का बुखार और वो भी इंटरनेशनल वाला। सो हमारे बाबू बिहारी को प्यार हो गया लंदन के निवासी हिलेरी पामर और मार्टिन पामर की सुपुत्री सैफरन से। अब भईया प्यार हुआ तो शादी भी करना ही था सो आखिर दस साल चले इस प्यार को दोनों के घरवालों ने रजामंदी दे ही दी और कल दोनों शादी के पवित्र बंधन में बंध ही गए।




अब भईया इंटरनेशनल दुल्हन आई है तो स्वागत भी जोरदार होना ही था जैसा की आप पिक्चर में देख ही रहें हैं। साथ ही में इस शादी के मुख्य मेहमान श्री लालू प्रसाद यादव जी भी थे। नीचे के तस्वीर में आप देख सकते हैं कि राजद सुप्रीमो श्री लालू यादव जी को सर पे साफा बांधे हुए। और हमारे लालू जी ने बरातियों की तरफ से रस्में भी अदा कीं।




इस शादी में हमारे दूल्हे बाबू के स्वागत में बहुत सारे लोग लंदन से भी आये थे। और आप देख सकते हैं सैफरन को मेहंदी लगवाते हुए।




हम भी इस प्रेमी जोड़े को बहुत सारी शुभकामनाये देते हैं और दुआ करते हैं की इनका ये रिश्ता अटूट बना रहे। लेकिन एक बात है, चन्द्रशेखर भइया ने भौकाल जमा दिया पुरे जिले में विलायती बहु ला के। बस अब ये देखना है की ये विलायती बहु अपनी सास का के लिए रोटी बनाएगी या ब्रेड जैम में ही काम चला देगी।



बाकी एक बात तो है बिहारी का डंका देश ही नहीं विदेश में भी बजता है।





Technology

[Technology][bleft]
 
Copyright © 2014 Khabar Bihari. Designed by OddThemes | Distributed By Gooyaabi Templates