बात इ है कि सैलुटेशन वाला फॉर्मेलिटी इंहा ना होता है, हमलोग बस लिख के ही ले लेते हैं।
आज की क्लास उन भाई बंधुओ के लिए है जो ट्रैफिक रूल को न मानने की कसम खा चुके हैं, इसे ना मानना उनके खून में ऐसे ठूंसा गया है जैसे केजरीवाल में नौटंकी और लालुआ के भेजा में ****. (हम बस ऑफ्फेन्सिव ना होना चाहते हैं 😋 )
जैसे भागलपुर की किसी गली में चले जाओ, वहां 'यहाँ पेशाब करना मना है' वाला बोर्ड अगर लगा हुआ है तो इसका सीधा सा मतलब है एक निमंत्रण उन भाई बंधुओ को जिनको आज हम कर लिए है टारगेट और सबसे ज्यादा विसर्जन वहीँ होगा। ( ना, हम हॉस्पिटल के पीछे वाली गली की बात एकदम ना कर रहे।)
सीतामढ़ी के लौंडे तो इस मामले में अव्वल दर्जे। गर्ल्स कॉलेज की बाहर जो 'गाडी धीरे चलाए' उसको तो वो पुरे नियत के साथ फॉलो करते हैं।
कूल डूड वहां आते ही मीटर खींच देंगे और अपने चक्षु लगा बैठते हैं लड़कियों पर इसलिए सामने ब्रेकर पर ओंधे मुह गिरकर अपनी तशरीफ़ तुड़वा लेते हैं ,और कुछ लोग बोर्ड पढ़ते ही गाडी इतना धीरे कर लेंगे की कछुआ भी ओवरटेक कर जाये ,असल में ये महानुभाव नियम नही मान रहे होते हैं लड़कियों को देखकर आँखे हरी कर रहे होते हैं | और साहब हैलमेट तो यहाँ तभी पहना जाता है जब कोई लड़की पीछे बैठी हो और मुंह छुपाना हो…. इस होड़ में अंकल लोग भी कहा पीछे हटने वाले हैं जिस दिन अपनी दो इंची जुल्फें रंगवा डालते हैं उसी दिन हैलमेट सर की बजाय हाथ में आ जाता है | और पापा की परियां, एंजेल , प्रिंसेस जिनका अपना अलग ही स्टेटमेंट होता है ‘ट्रैफिक रूल्स माय फूट……महाय लाय्फ़ महाय रूल्स’ जिनको हैलमेट पहनाना मतलब घोड़े को खुरताल पहनाना…और जब ये परियां फॉर व्हीलर की सीट पर बैठती हैं तो किसी को सवर्ग की सैर करवा कर मानती हैं, इनका बस चले तो घर में बैठे इन्सान को दूसरा माले पर जाकर टक्कर मार दें |
मासूमियत के आड़ में कुछ लौंडे तो ट्रैफिक पुलिस के तोंद के नीचे से ऐसे भाग जाते हैं, जैसे चूजा अंडे से।
और इस बेइज्जती का कहर उन बेचारे शरीफो पर बरसता है जो दीदी कल जल्दी स्कूल पहुँचाने के चक्कर में हेलमेट घर छोड़ देते हैं।
और हद तो तब हो गयी थी जब दरभंगा वाले चाचा का इसी चक्कर में चालान कट गया। वो तो बाद में पता चला की चचा तो हमरे पैदल ही तान रहे थे।
इसलिए कह रहे है मूढ़ प्राणियो, सुधर जाओ वरना बाद जो धक्के चढ़ता है उसपर सारे चार्ज लगा डालते हैं आजकल, सीट बेल्ट नही लगाया , बत्ती तोड़ी , हैलमेट नही है, RC नही है ,लाइसेंस नही है ,घर पर आटा नहीं है ,तेल नही है, साबुन नही है………
दिल्ली मोड़ या फिर कांटी की हाईवे, ट्रक ड्राईवर का कहर चरम पे होता है वे सब जगह, ये तो पैदा ही सिग्नल तोडकर होते हैं जब ये गाड़ी ले कर सड़कों पर उतरते हैं तो लगता है मानो किसी ने बीच सड़क सांड को खुला छोड़ दिया हो ,ऐसे में जब ये हॉर्न भी बजाते हैं तो लगता है माने यमलोक में शंख बज रहा हो….
तो सुनो ऊपर लिखित किसी भी कैटेगरी में आने वाले भाई बंधज चाचा लोग,
सब हंसीं मजाक से परे जिंदगी उपर वाले का दिया सबसे अनमोल तोहफा है, इसे जाया ना करें , अपनों की नजर में अपनी अहमियत समझें जिनको आपके घर के बाहर बाइक लेकर निकलते ही चिंता सताने लगती है…आपकी तेज़ रफ़्तार और लापरवाही आप की नही किसी दुसरे के घरों के भी चिराग बुझा सकती है ….अपना कर्तव्य समझें…ट्रैफिक नियमों का पालन करें ||
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आल दी इमेजेस आर प्रॉपर्टी ऑफ़ देअर ओनर। (we owe our thanks )






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